उत्तराखंड में फूलदेई को विभिन्न नामों से जाना जाता है। कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों में इसे ‘फूल संग्रात’ या ‘फूल संक्रांति’ कहा जाता है, जबकि जौनसार क्षेत्र में इसे ‘गोगा’ नाम से जाना जाता है।
मुख्यमंत्री का संदेश: संस्कृति का संरक्षण आवश्यक
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा, “फूलदेई न केवल हमारी संस्कृति का प्रतीक है, बल्कि यह हमें प्रकृति से प्रेम करना और उसका सम्मान करना सिखाता है। यह त्योहार हमारी धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का अवसर प्रदान करता है।”
समारोह की प्रमुख झलकियाँ
- विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने पारंपरिक नृत्य और गीत प्रस्तुत किए।
- बच्चों ने हाथों से फूलों की रंगोली बनाकर इस पर्व की शोभा बढ़ाई।
- स्थानीय कलाकारों ने उत्तराखंडी लोकगीतों और नृत्यों की प्रस्तुति दी।
- मुख्यमंत्री ने सभी बच्चों को आशीर्वाद दिया और उन्हें उपहार प्रदान किए।
फूलदेई: नई पीढ़ी के लिए सीख
बदलते समय के साथ कई पारंपरिक त्योहार धीरे-धीरे लुप्त हो रहे हैं, लेकिन उत्तराखंड में फूलदेई को संजोने और अगली पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन, स्कूलों और सांस्कृतिक संगठनों के सहयोग से इस त्योहार को बड़े स्तर पर मनाने की परंपरा को बनाए रखा जा रहा है।उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने के लिए सरकार भी पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

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