उत्तराखंडी फिल्म ‘खोली का गणेश’ को मिल रहा ज़बरदस्त प्यार, शुभम सेमवाल की अदाकारी ने जीता दिल

देहरादून से शुरू हुई लोकप्रियता अब दिल्ली और कोटद्वार तक पहुँची, हाउसफुल जा रहे शो


देहरादून में फिल्म ने मचाई धूम

उत्तराखंडी सिनेमा में एक नया कीर्तिमान स्थापित करती फिल्म ‘खोली का गणेश’ इन दिनों दर्शकों की जुबान पर है। देहरादून के Mall of Dehradun और Centrio Mall में इस फिल्म के सभी शो हाउसफुल चल रहे हैं। दर्शकों का उत्साह और सकारात्मक प्रतिक्रिया देखकर अब यह फिल्म 25 अप्रैल 2025 से दिल्ली और कोटद्वार के सिनेमाघरों में भी रिलीज़ की जा रही है।


शुभम सेमवाल की अदाकारी ने छोड़ी गहरी छाप

रुद्रप्रयाग के नौगाँव तिमली बड़मा के रहने वाले अभिनेता शुभम सेमवाल को इस फिल्म में उनके किरदार ‘महेश’ के लिए खूब सराहना मिल रही है। उनकी सरलता और अभिनय की गहराई ने सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों के दर्शकों का भी दिल जीत लिया है। सोशल मीडिया पर उनके अभिनय की जमकर तारीफ़ हो रही है।


तकनीकी देरी के बाद शानदार शुरुआत

फिल्म की शुरुआत में इसकी रिलीज़ 31 जनवरी 2025 को तय की गई थी, लेकिन तकनीकी कारणों से इसे 18 अप्रैल 2025 को सिनेमाघरों में उतारा गया। हालांकि यह देरी फिल्म की लोकप्रियता पर बिल्कुल असर नहीं डाल सकी। रिलीज़ के पहले ही दिन से दर्शकों ने इसे भरपूर प्यार दिया।


प्रीतम भरतवाण ने भी की तारीफ़

23 अप्रैल को उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगायक प्रीतम भरतवाण भी यह फिल्म देखने पहुंचे और उन्होंने इसके कंटेंट, निर्देशन और अभिनय की दिल खोलकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “‘खोली का गणेश’ उत्तराखंड की आत्मा को बड़े पर्दे पर उतारने वाली फिल्म है।”


समाज को झकझोरने वाला विषय

यह फिल्म सिर्फ एक मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह एक सशक्त सामाजिक संदेश लेकर आती है। इसमें उत्तराखंड में व्याप्त जातिगत भेदभाव जैसे गंभीर मुद्दे को उठाया गया है। निर्देशक अविनाश ध्यानी ने न केवल फिल्म को लिखा और निर्देशित किया, बल्कि इसे खुद निर्मित भी किया है।


दमदार कलाकारों की टोली

फिल्म में शुभम सेमवाल और सुरुचि सकलानी के साथ-साथ दीपक रावत, रश्मि नौटियाल, राजेश नौगाईं, गोकुल पंवार, श्वेता थपलियाल, सुशील रणकोटी और अरविंद पंवार जैसे अनुभवी कलाकारों ने भी बेहतरीन अभिनय किया है। विनय जोशी के भावुक अभिनय और गीतों ने दर्शकों को भावुक कर दिया।


गीत-संगीत ने जोड़ा दिलों से

फिल्म के संगीत ने भी दर्शकों के दिलों को छू लिया है। इसका संगीत अमित वी कपूर ने तैयार किया है और गीतों को अमित खरे और प्रतीक्षा बमरारा ने गाया है। संगीत संयोजन में मेघा ध्यानी, मुदित बौठियाल और अखिल मौर्य का योगदान सराहनीय है। एडिटर धनंजय ध्यानी ने फिल्म को एक सुंदर प्रवाह दिया है, जिससे दर्शक हर क्षण कहानी से जुड़े रहते हैं।


प्राकृतिक सौंदर्य में रची-बसी कहानी

फिल्म की शूटिंग उत्तराखंड के खूबसूरत और प्राचीन क्षेत्रों जैसे जाखोल, चकराता और माकटी में की गई है। इन लोकेशनों ने फिल्म को एक अलग ही आध्यात्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य प्रदान किया है। एग्ज़ीक्यूटिव प्रोड्यूसर रेज़ा खान और लाइन प्रोड्यूसर जीत मैला गुरंग की मेहनत हर फ्रेम में झलकती है।


फिल्म बनाना नहीं, पहुँचाना था चुनौती: निर्देशक

निर्देशक अविनाश ध्यानी कहते हैं, “फिल्म बनाना पहला कदम है, असली चुनौती इसे सही दर्शकों तक पहुँचाना होता है।” उन्होंने फिल्म के वितरण में सहयोग देने वाले विकास जैन और जयवीर सिंह पंगाल का विशेष आभार जताया, जिनके प्रयासों से फिल्म दिल्ली और कोटद्वार जैसे प्रमुख शहरों तक पहुँच पाई।


उत्तराखंडी सिनेमा की बदलती पहचान

‘खोली का गणेश’ आज सिर्फ एक फिल्म नहीं रही, यह उत्तराखंडी सिनेमा के लिए एक आंदोलन बनती जा रही है। यह फिल्म दिखाती है कि स्थानीय कहानियों में भी वो ताकत है जो दर्शकों को बाँध सकती है और समाज को आइना दिखा सकती ह

‘खोली का गणेश’ ने उत्तराखंड के सिनेमा को एक नई दिशा दी है। एक सशक्त कहानी, मजबूत अभिनय, मधुर संगीत और सामाजिक सरोकार को साथ लेकर यह फिल्म न केवल दर्शकों को मनोरंजन दे रही है, बल्कि समाज में बदलाव की अलख भी जगा रही है। यह फिल्म देखना न केवल एक सिनेमा अनुभव है, बल्कि एक भावनात्मक यात्रा भी है।

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