महाकुंभ का अनोखा आश्रम: विदेशी महामंडलेश्वर और भारतीयता का संगम

शक्तिधाम आश्रम: महाकुंभ की अद्वितीय पहचान

प्रयागराज के महाकुंभ में स्थित शक्तिधाम आश्रम इस बार चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यह आश्रम अपनी अनोखी विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध है, क्योंकि यहां के नौ महामंडलेश्वर विदेशी मूल के हैं। इनमें से कोई अमेरिका से, कोई इजराइल से, तो कोई जापान से है। इस आश्रम को महाकुंभ का सबसे अनोखा आश्रम माना जा रहा है।

संस्कृत में पारंगत महामंडलेश्वर

शक्तिधाम के इन महामंडलेश्वरों की खासियत यह है कि ये भले ही हिंदी सही से न बोल पाएं, लेकिन संस्कृत में इतनी दक्षता रखते हैं कि फर्राटेदार पाठ कर सकते हैं। आश्रम में नियमित रूप से वेद मंत्रों का पाठ, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान इन महामंडलेश्वरों की देखरेख में होता है। यह आश्रम भारतीय संस्कृति और परंपराओं का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है।

नौ में सात पुरुष और दो महिलाएं

शक्तिधाम आश्रम के नौ महामंडलेश्वरों में सात पुरुष और दो महिलाएं शामिल हैं। इन महामंडलेश्वरों ने भारतीय सनातन धर्म की शिक्षा और साधना को अपने जीवन का हिस्सा बनाया है।

विदेशी महामंडलेश्वरों की यात्रा

इन महामंडलेश्वरों ने अपने-अपने देशों से भारत की ओर रुख किया, यहां की संस्कृति को अपनाया और सनातन धर्म में दीक्षित हुए। अमेरिका, इजराइल, और जापान जैसे देशों से आने वाले ये महामंडलेश्वर अब पूरी तरह से भारतीय परंपराओं में रच-बस चुके हैं। इनमें से एक महामंडलेश्वर हिंदी में बातचीत करने में भी सक्षम हैं।

कुंभ मेले में आकर्षण का केंद्र

कुंभ मेले के सेक्टर-17 में स्थित शक्तिधाम आश्रम न केवल भारतीय भक्तों बल्कि विदेशी पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया है। यहां नियमित रूप से होने वाले संस्कृत पाठ और अनुष्ठान विदेशी पर्यटकों को भारतीय संस्कृति के करीब लाने का काम करते हैं।

भारतीय रंग में रंगे विदेशी संत

शक्तिधाम के ये संत न केवल भारतीय वेशभूषा अपनाते हैं, बल्कि भारतीय खानपान और जीवनशैली को भी पूरी तरह आत्मसात कर चुके हैं। उन्हें देखकर कोई यह नहीं कह सकता कि वे विदेशी मूल के हैं।

सनातन धर्म के प्रति समर्पण

इन महामंडलेश्वरों का कहना है कि भारतीय सनातन धर्म ने उन्हें जीवन का सही मार्ग दिखाया। वे इस धर्म की गहराई और व्यापकता से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इसे अपनी पहचान बना लिया। उनका उद्देश्य है कि वे भारतीय संस्कृति और धर्म का प्रचार-प्रसार पूरी दुनिया में करें।

कुम्भ मेले में महत्वपूर्ण भूमिका

महाकुंभ जैसे विराट आयोजन में शक्तिधाम आश्रम की भूमिका बेहद खास है। यहां होने वाले धार्मिक आयोजन और संस्कृत में होने वाले प्रवचन न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति को भी सुदृढ़ करते हैं। यह आश्रम इस बात का प्रमाण है कि भारतीय संस्कृति की गूंज सीमाओं से परे भी सुनाई देती है

You May Also Like

More From Author

+ There are no comments

Add yours