द्वाराहाट की बेटी ने किया नाम रोशन
उत्तराखंड की बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। इस बार अल्मोड़ा जिले की द्वाराहाट निवासी तेजस्विनी शर्मा ने दुबई में आयोजित सी स्विमिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर पूरे देश को गौरवान्वित किया है। यह उपलब्धि उनके कठिन परिश्रम और परिवार के सहयोग का नतीजा है।
वनस्थली विद्यापीठ से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता
तेजस्विनी शर्मा वर्तमान में राजस्थान के वनस्थली विद्यापीठ में शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। उन्होंने इस प्रतियोगिता में विद्यापीठ का प्रतिनिधित्व किया और शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीता। उनकी इस सफलता पर वनस्थली विद्यापीठ में उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय की निदेशक ने मेडल पहनाकर उनका उत्साहवर्धन किया।
पढ़ाई और खेल दोनों में बेहतरीन प्रदर्शन
तेजस्विनी बचपन से ही पढ़ाई और खेल दोनों में अव्वल रही हैं। स्कूल स्तर की प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने कई स्वर्ण पदक जीते हैं। तैराकी में उनकी गहरी रुचि और लगन ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता दिलाई है। उनकी इस उपलब्धि ने उनके गांव, राज्य और देश का गौरव बढ़ाया है।
पारिवारिक समर्थन और संघर्ष की कहानी
तेजस्विनी की सफलता के पीछे उनके परिवार का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके पिता रमेश चंद्र शर्मा हल्द्वानी में अपना लघु व्यवसाय करते हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किया। उनके माता-पिता की मेहनत और समर्थन ने तेजस्विनी को इस मुकाम तक पहुँचाया है।
अन्य लड़कियों के लिए प्रेरणा बनीं तेजस्विनी
तेजस्विनी शर्मा की सफलता उन सभी लड़कियों के लिए प्रेरणा है जो खेल और शिक्षा के क्षेत्र में कुछ बड़ा करना चाहती हैं। उनकी यह उपलब्धि यह साबित करती है कि अगर मेहनत, आत्मविश्वास और सही मार्गदर्शन मिले, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।
उत्तराखंड की बेटियां आगे बढ़ रही हैं
उत्तराखंड की बेटियां आज हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। तेजस्विनी शर्मा की तरह कई होनहार लड़कियां देश-विदेश में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। यह राज्य के लिए गर्व की बात है कि उसकी बेटियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं।
भविष्य की संभावनाएं
तेजस्विनी शर्मा की इस सफलता के बाद उनके करियर की संभावनाएं और भी उज्जवल हो गई हैं। यदि उन्हें उचित प्रशिक्षण और संसाधन मिलें, तो वे भविष्य में और भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं। उनकी मेहनत और समर्पण को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले समय में वे देश की शीर्ष तैराकों में शामिल हो सकती हैं।

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