नई दिल्ली। पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव और हालिया पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत सरकार ने एक बार फिर सुरक्षा मोर्चे पर कमर कस ली है। 54 वर्षों बाद देशभर में एक साथ मॉक ड्रिल का आयोजन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य किसी भी संभावित युद्ध या आतंकी हमले की स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस आयोजन का समय बेहद संवेदनशील और रणनीतिक माना जा रहा है।
पहलगाम हमले का बदला: ऑपरेशन ‘सिंदूर’
भारत ने आतंकियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित नौ आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की है। इस ऑपरेशन को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में की गई है जब सीमा पर तनाव चरम पर है और किसी भी तरह के टकराव की आशंका जताई जा रही है।
केंद्र सरकार का निर्देश: 244 जिलों में मॉक ड्रिल

गृह मंत्रालय के तहत नागरिक सुरक्षा के अतिरिक्त महानिदेशक बी. संदीपकृष्ण ने 2 मई और फिर 5 मई को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर मॉक ड्रिल का आदेश दिया। इसमें देश के 244 सीमावर्ती और तटीय जिलों को शामिल किया गया है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं।
क्यों जरूरी हुई यह मॉक ड्रिल?
1971 के युद्ध के बाद पहली बार ऐसा व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित हो रहा है। इसका मकसद है—
- हवाई हमले की स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना
- चेतावनी सायरन, ब्लैकआउट और सुरक्षित निकासी जैसे अभ्यास कराना
- आम नागरिकों, छात्रों और संस्थानों को आपातकालीन हालात से निपटने का प्रशिक्षण देना
ड्रिल में क्या-क्या होगा?
सरकार के निर्देशों के अनुसार, मॉक ड्रिल में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अभ्यास किया जाएगा:
- चेतावनी सायरनों का परीक्षण
- अचानक बिजली बंद कर ब्लैकआउट की तैयारी
- महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की पहचान छिपाने की प्रक्रिया
- स्कूल, अस्पताल और सार्वजनिक स्थलों से सुरक्षित निकासी
- छद्म नियंत्रण कक्ष और आपातकालीन सेवाओं की तैनाती
- अग्निशमन, चिकित्सा, रेडियो और हॉटलाइन संचार व्यवस्था की जांच
आम लोगों को क्या तैयारी रखनी चाहिए?
सरकार ने आम नागरिकों को सलाह दी है कि वे आपात स्थिति में निम्नलिखित तैयारियां रखें:
- घर में प्राथमिक चिकित्सा किट, टॉर्च, मोमबत्तियां, रेडियो और नकद राशि
- ब्लैकआउट की स्थिति में बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित रखने की योजना
- सायरन सुनते ही नजदीकी बंकर या सुरक्षित स्थान की जानकारी
- स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन
मोदी सरकार की लगातार बैठकें: युद्ध जैसे हालात की आहट?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, वायुसेना प्रमुख एपी सिंह, नौसेना प्रमुख दिनेश के त्रिपाठी और थलसेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी के साथ लगातार बैठकें की हैं। जानकारों के मुताबिक, इन बैठकों को पाकिस्तान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
वायुसेना से समन्वय और विशेष संपर्क प्रणाली
नागरिक सुरक्षा अभ्यास नियम-1968 के तहत जारी निर्देशों में वायुसेना से हॉटलाइन और रेडियो संपर्क बनाए रखने की व्यवस्था पर विशेष जोर दिया गया है। वार्डन सेवा, बचाव अभियान, डिपो प्रबंधन जैसी सेवाओं को भी जांचा-परखा जा रहा है। साथ ही सभी संवेदनशील जिलों में नियंत्रण कक्ष और छद्म नियंत्रण केंद्रों की स्थापना के निर्देश दिए गए हैं।
कहां-कहां हो रही है मॉक ड्रिल?
हालांकि मॉक ड्रिल के जिलों की आधिकारिक सूची सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन dgfscdhg.gov.in वेबसाइट पर 244 सिविल डिफेंस जिलों की जानकारी उपलब्ध है। उत्तर प्रदेश में ऐसे 19 जिले शामिल हैं, जिनमें कानपुर, लखनऊ, मथुरा जैसे नाम शामिल हैं। कुछ जिले जैसे बक्शी का तालाब और सरवासा, जो वायुसेना अड्डों के पास हैं, भी इस सूची में हैं।
1971 के बाद अब 2025: ऐतिहासिक समानता
1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान देशभर में इसी तरह की नागरिक सुरक्षा मॉक ड्रिल की गई थी। उस समय भारत ने बांग्लादेश की आजादी में अहम भूमिका निभाई थी और पाकिस्तान से दो मोर्चों पर युद्ध लड़ा गया था। 2025 की यह ड्रिल भी एक ऐसे समय में हो रही है जब सीमा पर हालात चिंताजनक है
भारत सरकार का यह कदम बताता है कि वह न केवल सैन्य मोर्चे पर बल्कि नागरिक सुरक्षा के स्तर पर भी पूरी तरह से तैयार है। मॉक ड्रिल से न केवल प्रशासन की क्षमताओं की जांच होगी, बल्कि आम जनता को भी जागरूक और सतर्क किया जा सकेगा। यह तैयारी न केवल संभावित युद्ध को रोकने का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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