सफलता की नई मिसाल – मीना उपाध्याय

जब लगन और मेहनत का संगम होता है, तो सफलता निश्चित होती है। पिथौरागढ़ की मीना उपाध्याय ने अपनी कड़ी मेहनत से यह साबित कर दिया है। उन्होंने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा में राज्य में दूसरी रैंक हासिल कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

प्रारंभिक शिक्षा और संघर्ष

डॉ. मीना उपाध्याय पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट तहसील के खोली गांव की रहने वाली हैं। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा अपने गांव के स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद डीडीहाट के विवेकानंद विद्या मंदिर में पढ़ाई की। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा उन्होंने सरस्वती बालिका इंटर कॉलेज, पिथौरागढ़ से उत्कृष्ट अंकों के साथ पास की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने एलएसएम कैंपस से इतिहास विषय में पीएचडी की।

यूजीसी नेट में चार बार सफलता

डॉ. मीना उपाध्याय ने न केवल कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की बल्कि चार बार यूजीसी नेट परीक्षा भी उत्तीर्ण की। यह उनकी कड़ी मेहनत और उत्कृष्ट शैक्षणिक योग्यता का प्रमाण है।

पहले प्रयास में ही मिली कामयाबी

सबसे खास बात यह रही कि मीना उपाध्याय ने UKPSC असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा में पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर ली। यह साबित करता है कि जब कोई अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होता है, तो वह असंभव को भी संभव बना सकता है।

परिवार का सहयोग और प्रेरणा

अपनी इस सफलता का श्रेय मीना उपाध्याय अपने माता-पिता को देती हैं। उनके पिता आनंद बल्लभ उपाध्याय और माता ललिता उपाध्याय ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें हर संभव सहयोग दिया।

प्रेरणा और संदेश

डॉ. मीना उपाध्याय की सफलता उन सभी छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो कठिनाइयों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रयासरत हैं। उनकी कहानी यह सिखाती है कि अगर हम मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें, तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं रहती।

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