देहरादून: उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के 779 विद्यालयों को ‘उत्कृष्ट विद्यालय’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इस योजना से करीब 13,691 छात्र-छात्राओं को सीधा लाभ मिलेगा। शिक्षा महानिदेशक झरना कमठान ने इस संबंध में सभी जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं।
603 प्राथमिक और 76 उच्च प्राथमिक विद्यालय होंगे शामिल
शिक्षा महानिदेशक के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत 603 प्राथमिक विद्यालय और 76 उच्च प्राथमिक विद्यालयों को चुना गया है। इन विद्यालयों को शैक्षिक गुणवत्ता, आधारभूत संरचना, शिक्षक व्यवस्था और तकनीकी सुविधाओं के लिहाज से मजबूत किया जाएगा। योजना का उद्देश्य यह है कि एक विशेष परिधि में स्थित छोटे विद्यालयों को मिलाकर एक बेहतर स्कूल प्रणाली तैयार की जाए।
छात्रों को मिलेगा 100 रुपये प्रतिदिन यात्रा भत्ता
परिवहन की समस्या को ध्यान में रखते हुए एक विशेष योजना भी लागू की जा रही है। इन उत्कृष्ट विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को स्कूल आने-जाने के लिए हर दिन ₹100 की सहायता राशि दी जाएगी। यह राशि सीधे छात्रों को प्रदान की जाएगी ताकि वे नियमित रूप से विद्यालय आ-जा सकें और शिक्षा से वंचित न रहें।
11 सदस्यीय समिति करेगी निगरानी
इस योजना के सफल क्रियान्वयन और निगरानी के लिए जिलास्तर पर एक 11 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति की अध्यक्षता जिलाधिकारी करेंगे, जबकि मुख्य विकास अधिकारी उपाध्यक्ष होंगे और मुख्य शिक्षा अधिकारी सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे। समिति का काम चयनित विद्यालयों की प्रगति, संसाधनों की व्यवस्था और छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं की निगरानी करना होगा।
बालवाटिका से लेकर स्मार्ट क्लास तक होंगे सभी प्रावधान
उत्कृष्ट विद्यालयों में शिक्षण की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए कई पहल की जाएंगी। इनमें स्मार्ट क्लास, पुस्तकालय, खेल मैदान, अतिरिक्त कक्षाएं और बालवाटिका जैसे नवाचार शामिल होंगे। इसके अलावा विद्यालयों में छात्रों के लिए आधुनिक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी, ताकि वे आधुनिक शिक्षा पद्धति से लाभान्वित हो सकें।
शिक्षकों की संख्या और गुणवत्ता में होगा सुधार
शिक्षा महानिदेशक ने स्पष्ट किया है कि इन विद्यालयों में आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के मानकों के अनुसार न्यूनतम चार शिक्षक तैनात किए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर इससे अधिक शिक्षक भी नियुक्त किए जा सकते हैं। शिक्षकों की गुणवत्ता और प्रशिक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि छात्रों को बेहतर शैक्षणिक अनुभव मिल सके।
समेकित विद्यालय प्रणाली का होगा निर्माण
इस योजना के तहत आसपास के छोटे प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को मिलाकर एक समेकित विद्यालय तैयार किया जाएगा, जिसे उत्कृष्ट विद्यालय कहा जाएगा। इस तरह एक ही स्थान पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर शिक्षक, और सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे शिक्षा का स्तर ऊंचा उठेगा।
जिलाधिकारियों को दिए गए स्पष्ट निर्देश
शिक्षा महानिदेशक ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जिलाधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर उत्कृष्ट विद्यालयों की स्थापना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि यह योजना राज्य के शैक्षिक भविष्य के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है, यदि इसे गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ लागू किया जाए।
छात्रों और अभिभावकों में खुशी की लहर
इस योजना की घोषणा के बाद से छात्रों और उनके अभिभावकों में उत्साह है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावकों को उम्मीद है कि अब उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा, अच्छी सुविधाएं और सुरक्षित स्कूल वातावरण मिलेगा। परिवहन भत्ता मिलने से उन परिवारों को भी राहत मिलेगी जो दूरदराज़ के इलाकों से अपने बच्चों को स्कूल भेजने में असमर्थ थे।
शिक्षा की दिशा में एक निर्णायक कदम
उत्तराखंड सरकार का यह निर्णय न केवल शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि सामाजिक असमानता को भी कम करेगा। दूरदराज और ग्रामीण इलाकों के बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने का यह एक प्रभावशाली प्रयास है। यदि यह योजना सफल रही, तो यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

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