देहरादून में मिसाइल हमले और बम धमाके की मॉक ड्रिल, धराशाई हुई इमारतें, उजागर हुई तकनीकी खामियां

एमडीडीए कॉलोनी में मिसाइल हमला, ISBT पर धमाका – शहर में मची अफरा-तफरी

बुधवार शाम देहरादून में हुए मॉक ड्रिल ने कुछ देर के लिए असल संकट की स्थिति पैदा कर दी। मॉक ड्रिल के दौरान एमडीडीए कॉलोनी पर “मिसाइल हमला” और आईएसबीटी क्षेत्र में “बम धमाका” दिखाया गया, जिससे आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। इस अभ्यास में एक बहुमंजिला इमारत के गिरने की घटना को भी दर्शाया गया, जिसमें कई लोग घायल हुए। इन घायलों को मेडिकल टीम और एसडीआरएफ (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल) द्वारा सुरक्षित रेस्क्यू कर अस्पताल भेजा गया।

ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि में किया गया अभ्यास

इस मॉक ड्रिल की पृष्ठभूमि में हाल ही में हुए “ऑपरेशन सिंदूर” की बड़ी भूमिका रही। 22 अप्रैल को पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में किए गए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने यह संयुक्त अभियान चलाया था। इस ऑपरेशन में भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना ने मिलकर 9 आतंकी ठिकानों पर 24 मिसाइलों से हमला किया, जिसमें 70 से अधिक आतंकियों के मारे जाने और 60 से ज्यादा के घायल होने की पुष्टि हुई है। इसके बाद से भारत के विभिन्न शहरों में आपात स्थितियों से निपटने के लिए मॉक ड्रिल कराई जा रही हैं।

सायरन की आवाज से दहले लोग

शाम 4:15 बजे देहरादून के सात प्रमुख स्थानों – धारा पुलिस चौकी, लक्खी बाग पुलिस स्टेशन, जिलाधिकारी कार्यालय, एनआईवीएच स्कूल राजपुर रोड, आराघर पुलिस चौकी, एमडीडीए कॉलोनी और आईएसबीटी – पर सायरन और हूटर बजाए गए। अचानक गूंजी इन आवाजों से आमजन भयभीत हो गए और कई लोग सड़कों पर भागते नजर आए। प्रशासन ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए लोगों से संयम बनाए रखने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की।

प्रशासन की सतर्क निगरानी

इस पूरे अभियान की निगरानी जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में बनाए गए कंट्रोल रूम से की गई, जहां डीएम, एसएसपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। वहां से वायरलेस और कैमरों के माध्यम से शहर के विभिन्न हिस्सों की स्थिति पर नजर रखी गई और टीमों को जरूरी निर्देश दिए गए। प्रशासन ने ट्रैफिक को नियंत्रित करते हुए कुछ समय के लिए दुकानों को भी बंद कराया।

एमडीडीए में गिरी इमारत, घायलों का बचाव अभियान

मॉक ड्रिल में सबसे बड़ा दृश्य एमडीडीए कॉलोनी में देखने को मिला, जहां एक बहुमंजिला इमारत के गिरने की घटना दर्शाई गई। मौके पर मेडिकल टीम, फायर ब्रिगेड, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें तुरंत पहुंचीं। घायलों को प्राथमिक उपचार देकर एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया। वहीं, आईएसबीटी क्षेत्र में किए गए बम धमाके की मॉक घटना ने क्षेत्र में दहशत का माहौल बना दिया, हालांकि सभी घटनाएं पूर्व नियोजित थीं।

तकनीकी खामियों ने खोली तैयारियों की पोल

मॉक ड्रिल के दौरान कई तकनीकी कमियां सामने आईं, जो भविष्य में किसी असली आपदा के समय भारी पड़ सकती हैं। सबसे पहली समस्या सायरन की आवाज को लेकर रही। बताया गया कि वाहनों की आवाज और अन्य शोर के चलते कई इलाकों में सायरन सुनाई ही नहीं दिए। कुछ कैमरे कंट्रोल रूम से कनेक्ट नहीं हो पा रहे थे और वायरलेस संचार प्रणाली भी कई स्थानों पर फेल हो गई। रिस्पांस टाइम में भी देरी देखी गई, जिससे रेस्क्यू टीम की तत्परता पर सवाल खड़े हुए।

सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता और समन्वय का परीक्षण

हालांकि, इस अभ्यास का उद्देश्य सिर्फ खतरे से बचाव नहीं, बल्कि सभी एजेंसियों के बीच समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता की जांच करना भी था। सिविल डिफेंस, पुलिस, फायर विभाग, चिकित्सा विभाग और एसडीआरएफ ने मिलकर इस मॉक ड्रिल को अंजाम दिया। एजेंसियों के बीच संपर्क बनाना और संसाधनों की त्वरित तैनाती इस अभ्यास के प्रमुख बिंदु रहे।

जनता से मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया

अभ्यास के बाद आम जनता से मिली प्रतिक्रिया मिश्रित रही। कुछ लोगों ने इसे आवश्यक और सराहनीय बताया तो कुछ ने अचानक की गई इस मॉक ड्रिल को भय का कारण बताया। कुछ व्यापारियों ने दुकानें बंद कराने पर असहमति जताई, वहीं कई नागरिकों ने कहा कि इस तरह की तैयारियां ज़रूरी हैं ताकि संकट की घड़ी में सभी सुरक्षित रहें।

भविष्य के लिए सबक और सुधार की जरूरत

मॉक ड्रिल के दौरान उजागर हुई तकनीकी खामियों और सामंजस्य की समस्याएं यह स्पष्ट करती हैं कि प्रशासन और एजेंसियों को अभी और तैयारी करने की जरूरत है। विशेष रूप से, अलर्ट सिस्टम को मजबूत करना, सायरन की आवाज तेज करना, संचार नेटवर्क को दुरुस्त करना और रेस्क्यू टीम को ट्रेनिंग के साथ-साथ समय की पाबंदी सिखाना जरूरी है।


देहरादून में की गई यह मॉक ड्रिल सिर्फ एक अभ्यास नहीं, बल्कि एक चेतावनी थी कि संकट कब और कैसे आएगा, कोई नहीं जानता। इसलिए तैयार रहना और व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत करना आज की आवश्यकता है।

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