घाटी में छिपे दुश्मनों का पर्दाफाश: पाकिस्तान के आतंकियों को दे रहे थे मदद, 14 स्थानीय आतंकवादियों की पहचान

पहलगाम आतंकी हमले के बाद बड़ी कार्रवाई

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए घाटी में छिपे 14 स्थानीय आतंकियों की पहचान कर ली है। इन आतंकियों पर पाकिस्तान से आए बाहरी आतंकियों को जमीन और चिकित्सा सहायता प्रदान करने का आरोप है। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इन आतंकियों की एक सूची भी सार्वजनिक कर दी है।

तीन बड़े आतंकी संगठनों से जुड़े हैं आतंकी

जारी की गई सूची के अनुसार ये 14 आतंकी हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे कुख्यात आतंकी संगठनों से जुड़े हैं।

  • 3 आतंकी हिजबुल मुजाहिदीन से
  • 8 आतंकी लश्कर-ए-तैयबा से
  • 3 आतंकी जैश-ए-मोहम्मद से संबद्ध बताए गए हैं।
    इनकी उम्र 20 से 40 वर्ष के बीच है और सभी जम्मू-कश्मीर के विभिन्न जिलों से ताल्लुक रखते हैं।

14 आतंकियों की पूरी सूची

सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जिन 14 आतंकियों के नाम उजागर किए गए हैं, वे इस प्रकार हैं:

  1. अदिल रहमान डेंटू (21 वर्ष) – सोपोर जिले का कमांडर, 2021 से लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा।
  2. आसिफ अहमद शेख (28 वर्ष) – अवंतीपोरा जिले का जैश-ए-मोहम्मद का कमांडर।
  3. अहसन अहमद शेख (23 वर्ष) – पुलवामा में सक्रिय लश्कर आतंकी।
  4. हारिस नजीर (20 वर्ष) – 2023 से पुलवामा में सक्रिय लश्कर आतंकी।
  5. आमिर नजीर वानी (20 वर्ष) – 2024 से पुलवामा में सक्रिय जैश आतंकी।
  6. यावर अहमद भट – पुलवामा निवासी, 2024 से जैश से जुड़ा।
  7. आसिफ अहमद खंडे (24 वर्ष) – शोपियां निवासी, 2015 से हिजबुल से संबद्ध।
  8. नसीर अहमद वानी (21 वर्ष) – 2019 से शोपियां में लश्कर का सक्रिय सदस्य।
  9. शाहिद अहमद कुटाय (27 वर्ष) – शोपियां में लश्कर और उसके फ्रंट संगठन TRF से जुड़ा।
  10. आमिर अहमद डार – 2023 से शोपियां में सक्रिय लश्कर सदस्य।
  11. अदनान सफी डार – 2024 से लश्कर और TRF के लिए सूचना संप्रेषक।
  12. ज़ुबैर अहमद वानी उर्फ अबू उबैदा उर्फ उस्मान (39 वर्ष) – अनंतनाग में हिजबुल का ऑपरेशनल कमांडर।
  13. हारून रशीद गनई (32 वर्ष) – हिजबुल आतंकी, PoK से प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटे।
  14. जाकिर अहमद गनी (29 वर्ष) – कुलगाम निवासी, लश्कर का सदस्य और हमलों में शामिल।

पहलगाम हमला: 26 पर्यटकों की दर्दनाक मौत

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के बायसरन मैदान में दोपहर करीब 2 बजे भयानक आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में 26 निर्दोष पर्यटक मारे गए थे, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। इस हमले में दो स्थानीय और तीन पाकिस्तानी आतंकी शामिल थे।

  • स्थानीय आतंकी: अदिल गूरी और अहसन
  • पाकिस्तानी आतंकी: आसिफ फौजी, सुलेमान शाह और अबू तल्हा

सभी पांचों आतंकियों पर 20-20 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है। हमले के बाद घाटी में सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक तलाशी अभियान चलाया।

पाकिस्तान का गहरा षड्यंत्र

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में आतंक फैलाने के लिए पहले से ही कई स्थानीय युवाओं को बहकाकर अपने आतंकी संगठनों से जोड़ लिया है। ये युवा स्थानीय जानकारी का फायदा उठाते हुए विदेशी आतंकियों को शरण, सहायता और सुरक्षा प्रदान करते हैं। इस ताजा खुलासे ने घाटी में छिपे इस खतरे को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

हंदवाड़ा में तहरीक-ए-हुर्रियत पर कार्रवाई

पहलागाम हमले के बाद, हंदवाड़ा में अलगाववादी संगठन तहरीक-ए-हुर्रियत के खिलाफ भी बड़ा एक्शन लिया गया है। 175 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है और पूछताछ की जा रही है। एजेंसियां इस जांच के जरिए यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि आतंकियों को स्थानीय समर्थन कहां से मिल रहा है।

माछिल में आतंकी ठिकाना तबाह

हाल ही में माछिल के जंगलों में भी एक बड़ी कार्रवाई में आतंकियों का एक ठिकाना तबाह किया गया। वहां से भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए, जिनमें AK-47 राइफल, M4 राइफल के राउंड्स और अन्य सैन्य सामग्री शामिल थी। इससे साबित होता है कि पाकिस्तान लगातार घाटी में अशांति फैलाने के लिए अपने आतंकियों को सशस्त्र कर रहा है।

सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती

केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। सभी आतंकियों के खिलाफ निरंतर अभियान चलाकर उन्हें या तो गिरफ्तार किया जाएगा या मुठभेड़ में ढेर किया जाएगा। स्थानीय जनता से भी अपील की गई है कि यदि उन्हें किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत सुरक्षा बलों को सूचित करें।

जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद एक गंभीर समस्या बनी हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की चौकसी और लगातार चल रहे अभियानों से आतंकियों का नेटवर्क कमजोर हो रहा है। घाटी में अमन-चैन बहाल करने के लिए सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और हर दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। पहलगाम जैसे हमलों के बाद अब घाटी के दुश्मनों का पर्दाफाश होना आतंकवाद के खिलाफ बड़ी जीत मानी जा रही है।

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