शीतकाल के लिए बंद होंगे गंगोत्री नेशनल पार्क के गेट
गंगोत्री नेशनल पार्क, जिसे भारत का तीसरा सबसे बड़ा नेशनल पार्क कहा जाता है, के गेट आगामी 30 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। वन विभाग की टीम पार्क को बंद करने की तैयारियों में जुट गई है। हर साल यह पार्क 1 अप्रैल को पर्यटकों के लिए खोला जाता है और 30 नवंबर को शीतकाल के कारण बंद कर दिया जाता है। इस बार पार्क प्रशासन ने जानवरों की निगरानी के लिए 75 ट्रैप कैमरे लगाने का लक्ष्य तय किया है।
गंगोत्री नेशनल पार्क की खासियतें और इतिहास
1989 में स्थापित यह पार्क 1,553 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और समुद्र तल से 7,083 मीटर की ऊँचाई तक स्थित है। यह हिम तेंदुआ, भूरा भालू, कस्तूरी मृग, काला भालू, हिमालयन मोनाल, लाल लोमड़ी और भरल जैसे दुर्लभ वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। पार्क में ऐसे जानवर भी मौजूद हैं, जिन्हें दुर्लभ श्रेणी में रखा गया है। वर्ष 2017 में पहली बार यहां दो ट्रैप कैमरों में दुर्लभ अरगली भेड़ भी कैद हुई थी।
शीतकालीन निगरानी के लिए लगाए जाएंगे ट्रैप कैमरे
ग्रीष्मकाल में पार्क के वन्यजीवों की निगरानी के लिए वनकर्मी नियमित गश्त करते हैं, लेकिन शीतकाल में अत्यधिक बर्फबारी के कारण यह कार्य संभव नहीं हो पाता। इस कारण से पार्क प्रशासन ने इस बार 75 ट्रैप कैमरे लगाने का फैसला किया है, जो शीतकाल के दौरान भी वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे। ये कैमरे केदारताल, गोमुख ट्रैक, नेलांग घाटी के कारछा, चोरगाड, तिरपानी, नीलापानी, भैरोंघाटी और गर्तांग गली जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर लगाए जाएंगे।

गस्त पर निकली वनकर्मियों की टीमें
गंगोत्री नेशनल पार्क के वनकर्मियों की चार टीमें विभिन्न ट्रैक पर गश्त के लिए निकली हैं। इनमें गंगोत्री-केदारताल ट्रैक, दुमकोचौड़ चोरगाड ट्रैक, गोमुख और रुद्रगैरा ट्रैक शामिल हैं। हर टीम में 4 से 6 वन अधिकारी व कर्मचारी होते हैं। इन टीमों ने जानकारी दी है कि ऊँचाई वाले क्षेत्रों में अब तक ताजा बर्फबारी नहीं हुई है, लेकिन तापमान माइनस में पहुँचने से झरनों और नदियों का पानी जमने लगा है।

सफाई अभियान और कचरा प्रबंधन
पार्क प्रशासन ने गेट बंद करने से पहले सफाई अभियान भी चलाया है, जिसमें 6 क्विंटल कचरा एकत्रित किया गया। इस अभियान के तहत सर्वाधिक कचरा गोमुख ट्रैक से हटाया गया है। प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे भविष्य में पार्क में कचरा न फैलाएं और पर्यावरण की रक्षा करें

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