ऑनलाइन गेमिंग और नाबालिगों के मानसिक प्रभाव पर पड़ने वाला असर

‘फ्री फायर’ खेलते-खेलते नाबालिग लड़कियां हुईं लापता, पुलिस ने पंजाब से किया बरामद

ऑनलाइन गेमिंग का क्रेज बच्चों और किशोरों के लिए कई बार घातक साबित हो सकता है। देहरादून के विकासनगर की दो नाबालिग लड़कियां ‘फ्री फायर’ गेम खेलते हुए एक अज्ञात लड़के के संपर्क में आईं और उससे मिलने के लिए घर से भाग निकलीं। कई दिनों की तलाश के बाद पुलिस ने उन्हें पंजाब के बस स्टैंड से बरामद किया।

गायब होने की सूचना से परिवार में मचा हड़कंप

दोनों लड़कियां 2 फरवरी को अचानक घर से लापता हो गईं। परिजनों ने पहले खुद उन्हें ढूंढने की कोशिश की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो पुलिस को सूचना दी गई।

पुलिस जांच में खुलासा

जांच के दौरान पुलिस को लड़कियों की लोकेशन हरियाणा और पंजाब में मिली। कई दिनों की मशक्कत के बाद पुलिस ने उन्हें पंजाब के राजपुर इलाके के बस स्टैंड से पकड़ लिया। पूछताछ में लड़कियों ने बताया कि वे ऑनलाइन गेमिंग के जरिए एक लड़के के संपर्क में आई थीं और उससे मिलने के लिए घर छोड़ दिया।

मानसिक स्वास्थ्य पर ऑनलाइन गेमिंग का असर

ऑनलाइन गेमिंग केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालने लगा है। गेमिंग के दौरान अज्ञात लोगों से दोस्ती करना और उनके प्रभाव में आकर गलत फैसले लेना नाबालिगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

माता-पिता की भूमिका और आवश्यक सतर्कता

इस घटना से सीख लेते हुए माता-पिता को चाहिए कि वे:

  1. बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें।
  2. उन्हें अजनबियों से बातचीत करने से रोकें।
  3. ऑनलाइन गेमिंग के अधिक उपयोग को सीमित करें।
  4. बच्चों को साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूक करें।

लड़कियों को परिवार को सौंपा गया

पुलिस ने दोनों लड़कियों को सुरक्षित परिवार को सौंप दिया। साथ ही यह सुनिश्चित किया कि वे किसी अपराध का शिकार न हुई हों।

यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि ऑनलाइन गेमिंग का अत्यधिक उपयोग नाबालिगों के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है। माता-पिता और समाज को मिलकर इस समस्या का समाधान निकालना होगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

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